Monday, 21 November 2016

मजाज़ से मेरा परिचय




मजाज़ से मेरा परिचय बड़ा ही अनोखा है | मजाज़ सड़कों पर आवार घूमने वाला शायर है |जीसे रात एक ओर प्रेमिका के घर जाने को कहती है और दूसरी ओर सूनसान वीराने की ओर | मजाज़ शुरू से ही सौन्दर्य प्रिय व्यति थे , यदि कुटुंब मे कोई सुंदर स्त्री आजाती तो घटो उसके पास बैठे रहते | मजाज़ के जीवन की सबसे बड़ी ट्रेजडी औरत है | वह एक प्रेम समर मे हारा हुआ व्यक्ति है और संसार के तिरस्कार का शिकार है | उसके हृदय मे समाज की विशमताओं के खिलाफ प्रचंड क्रांति है |
अब मैं विस्तृत ढंग से मजाज़ को बताता हूँ |
मजाज़ उर्दू शायरी का कीट्स है |
मजाज़ बड़ा चुटकुलेबाज है |
मजाज़ अच्छा शायर और घटिया शराबी है |
मजाज़ लीम – पागल लेकिन निसकपट व्यक्ति है |
ये तमाम बातें मजाज़ को बहुत करीब से जानने वाले लोग कहते हैं |
मजाज़ अपने जीवन मे भटकता ही रहा | वह रातों को शराब के लिए भटकता था फिर शराब पी कर भटकता था | वह कभी अपनी जीवन की असफलताओं पर दुखी होता तो कभी उनका मजाक उड़ाता |
मजाज़ एक मस्ती , माधोषि मे जीने वाला शायर था | उसने कहा
        मेरी बर्बादी के हमनशीनों
        तुम्हें क्या खुद मुझे भी कोई गम नही है |
मजाज़ को शुरू से ही रतजगे की बीमारी थी | इस कारण घर के लोगों ने उनका नाम जग्गन रखदिया था |पर बाद मे मजाज़ को शराब पीने पर भी बिलकुल नीद नहीं आती थी |
मजाज़ जब भी महफिल मे जाते तो उन्हे ताबड़तोड़ पैग पेश कीये जाते और ताबड़तोड़ नजमे सुनी जाती | जब मेजबान देखते की मजाज़  आपे से बाहर हो गया है और उससे अब और कुछ नहीं सुनाया जाएगा तब उसे ड्राएवर के हवाले कर देते |
ऐसी शराबनोश के लिए मजाज़ तो बेगुनाह तो नहीं था लेकिन उसकी दयनीय मृत्यु के लिए उन दयालुओं को भागीदार समझना गलत नही होगा |
मजाज़ के जिंदगी के हालत बहुत ही दुखद थे | १९३६ मे रेडियो की ओर से प्रकाशित होने वाली पत्रिका आवाज का संपादक बन जब मजाज़ दिल्ली आया तो उसने लड़की के चक्कर मे ऐसा घाव खाया की वह कभी ठीक न हो सका | एक वर्ष मे ही वह नौकरी छोड़ के चला गया | अब उसने बेतहाशा शराबनोशी शुरू करदी थी |१९४० मे उसपर  नर्वस ब्रेकडाउन  का पहला आक्रमड़ हुआ |
उसने दिल्ली के उच्च घराने की एकलौती लड़की से प्रेम किया था , पर विवाहित होने के कारण सब कुछ नाश हो गया | वह यह कहते हुआ दिल्ली से गया की :
       रुखसत ऐ दिल्ली ! तेरी माफिल से जाता हूँ मैं
       नौहागर जाता हूँ मैं , नाला –ब-लब जाता हूँ मैं   
मजाज़ की जिंदगी मे अनेक उतार चढ़ाव थे ४४ साल की उम्र मे उनहो ने अपनी उम्र से बढ़ कर कई रचनाए दी |
वह वाकई उर्दू  शायरी  का कीट्स है |
मैं तो एक छोटा कलमकार होने के नाते बस मजाज़ को यही कह सकता हूँ कि :
 जब शेर से उभरे है इश्क संग इंकलाब
 तो समझो गए है मजाज़ |
फिर मुलाक़ात होगी अगले ब्लॉग मे |



Tuesday, 15 November 2016

कविता से परिचय

मैं अभी कक्षा 10 में हूँ और यह ब्लॉग सिर्फ कविता शायरी के लिए यह ब्लॉग बनाया है | मैं एसके माध्यम से आप तक अपनी रचनाएँ भी पाहुचने की कोशिस करुंगाँ |
यह ब्लॉग सिर्फ कविता और शायरी के लिए बना है |
शुरू करने  से पहले मैं आप को यह बताना चाहूँगा  की  कविता का वास्तविक अर्थ क्या है ?
वैसे आप को अर्थ तो कई मिल जाएगे लेकिन जो सबसे छूटा और सरल है तथा मुझे पसंद है वो है
क - कल्पना
वि - विचार 
ता - तालमेल
तो कल्पना और विचार का ताल मेल ही कविता कहलाता है |
लिखने का सफर बहुत पहले और कम उम्र मे ही शुरू हो गया था मुझे याद है पहली दो पंगतिओ की कविता मई ने कक्षा ५ में लिखी  थी | फिर अब तक लिख रहा हूँ , कुछ अनुभवी कवियों से फेस्बूक पर बात की तो उनहो ने कुछ राय देने क बजाए बस कहा लिखते रहो |
मैं ने भी उनकी बात मानी और लिख रहा हूँ | जो कुछ लिखा मै ने उसे आप तक पाहुचने का प्रयास करता हूँ |
मेरी जिंदगी उलझनों से भरी है तो मै ने लिखा -
१- यहाँ किस्से में किस्सा है मेरी जिंदगी भी एक किस्से का हिस्सा है \
    मैं एक मिसरा शेर का , तू दूसरा हिस्सा है
    औरों के लिए जीना मारना सीख ले
    क्यू की कुछ पाना और खोना तो जीवन किस्से का हिस्सा है |
                          - स्वामी चरण सिंह
ये तो हो गई मुक्तक की बात लेकिन मैं ने  कई और कविताएं भी लिखी वो आप अगले ब्लॉग में पढ़ेगे |
तब तक मेरी और कविताएं और रचनाए पढ़ने के लिएय फेस्बूक पगे लाइक कीजीए- https://www.facebook.com/Shayarloak-by-swami-singh-143155326093824/?fref=hovercard
फिर मिलेगे अगले ब्लॉग मे |